Check before taking out a loan
Check before taking out a loan : जब इंसान लोन लेने की सोचता है, तो उस वक्त दिमाग ज़्यादा नहीं चलता — ज़रूरत बोलती है। कभी घर चाहिए, कभी शादी सामने होती है, कभी बीमारी या कोई मजबूरी। बैंक वाले मुस्कुराते हैं, EMI छोटी-सी दिखती है और आदमी सोचता है — “चल जाएगा… किसी तरह।”लेकिन सच ये है कि लोन लेने का फैसला उसी दिन भारी पड़ता है, जिस दिन EMI पहली बार कटती है। यह पोस्ट न तो बैंक की भाषा में है, न किसी फाइनेंस गुरु की क्लास। यह उसी इंसान की बात है जिसने लोन लिया है, EMI भरी है और गलती भी की है।
सबसे पहला सवाल: क्या लोन सच में ज़रूरी है?
यह सवाल छोटा है, लेकिन सबसे ज़्यादा लोग यहीं गलती करते हैं।
खुद से साफ-साफ पूछिए:
- क्या यह खर्च कुछ महीने टल सकता है?
- क्या बिना लोन के कोई रास्ता है?
- क्या यह ज़रूरत है या सिर्फ मन की इच्छा?
सच्चाई यह है बहुत से लोन ज़रूरत के नहीं, जल्दबाज़ी के होते हैं।
EMI छोटी लग रही है, पर असर बड़ा होगा
अक्सर लोग कहते हैं: “EMI तो बस पाँच-छह हज़ार है।”
पर EMI अकेली नहीं आती। उसके साथ आते हैं:
- घर का खर्च
- बच्चों की फीस
- दवा, पेट्रोल, राशन
- और अचानक आने वाली परेशानियाँ
अगर आपकी EMI:
- सैलरी का बड़ा हिस्सा खा रही है
तो कुछ ही महीनों में लगेगा कि पैसा हाथ में रुक ही नहीं रहा। लोन ऐसा मत लीजिए जो हर महीने आपकी साँसें गिनने लगे।
सिर्फ ब्याज मत देखिए, पूरा हिसाब समझिए
बैंक कहेगा “सर, ब्याज तो बहुत कम है।”
आपको पूछना चाहिए:
- कितने साल के लिए?
- कुल मिलाकर मैं कितना लौटाऊँगा?
अक्सर होता ये है:
- ₹2–3 लाख का लोन
- और वापसी ₹4–5 लाख
तब समझ आता है कि लोन सस्ता नहीं था, बस धीरे-धीरे काट रहा था।
लोन कितने साल का लिया है — यही असली खेल है
लंबी अवधि:
- EMI कम
- लेकिन ब्याज बहुत ज़्यादा
छोटी अवधि:
- EMI भारी
- लेकिन जल्दी आज़ादी
यहाँ सही या गलत कुछ नहीं। सही वही है जो आपकी जेब सह सके और नींद खराब न करे।
गिरवी वाला है या बिना गिरवी वाला?
यह फर्क न समझना लोगों को बहुत भारी पड़ता है।
- गिरवी वाला लोन: घर, गाड़ी या सोना दांव पर
- बिना गिरवी वाला लोन: भरोसे पर पैसा, लेकिन ब्याज ज़्यादा
खुद से पूछिए: अगर EMI नहीं भर पाया तो नुकसान क्या होगा?
छुपे चार्ज बाद में बहुत चुभते हैं
लोन लेते वक्त सब आसान लगता है। बाद में पता चलता है:
- प्रोसेसिंग फीस
- लेट EMI पर जुर्माना
- जल्दी चुकाने पर भी चार्ज
ये छोटे-छोटे पैसे धीरे-धीरे जेब खाली कर देते हैं। जो आज नहीं बताया जा रहा, वही कल सबसे ज़्यादा चुभेगा।
अगर कमाई रुक गई तो?
यह सवाल डराने के लिए नहीं है। यह हकीकत है।
सोचिए:
- 2–3 महीने काम न मिला तो EMI?
- नौकरी चली गई तो क्या होगा?
अगर इसका जवाब साफ नहीं है, तो लोन लेने का समय अभी सही नहीं है।
एग्रीमेंट पढ़ना उबाऊ है, पर ज़रूरी है
मानते हैं — कोई भी लोन एग्रीमेंट पढ़ना पसंद नहीं करता।
लेकिन उसी में लिखा होता है:
- बैंक के अधिकार
- आपकी मजबूरियाँ
- जुर्माने की शर्तें
बाद में कहना कि “मुझे पता नहीं था” किसी काम नहीं आता।
यह भी देखें: EMI Trap : आसान किस्तें कैसे आपकी कमाई पर बोझ बन जाती हैं? जाने
एक बात जो कोई सीधे नहीं कहता
लोन बुरा नहीं है। लेकिन गलत समय पर लिया गया लोन अच्छी ज़िंदगी का मज़ा छीन लेता है।
अगर लोन:
- सोच-समझकर लिया है
- आपकी औकात के अंदर है
तो वह सहारा बनता है। वरना वही लोन बोझ बन जाता है।
निष्कर्ष: लोन लेने से पहले रुकना भी समझदारी है
हर लोन लेने से पहले थोड़ा रुकना ज़रूरी है।
क्योंकि:
- लोन आज मिलता है
- लेकिन EMI हर महीने याद दिलाती है
फैसला आज का होता है, असर सालों तक चलता है।
FAQs – बिल्कुल सीधे जवाब
Q1. लोन लेने से पहले सबसे ज़रूरी क्या है?
अपनी चुकाने की ताकत समझना।
Q2. EMI कितनी होनी चाहिए?
इतनी कि ज़िंदगी भी आराम से चले।
Q3. सिर्फ कम ब्याज देखना सही है?
नहीं, कुल रकम देखनी चाहिए।
Q4. बिना पढ़े साइन करना कितना गलत है?
बहुत ज़्यादा।
Q5. लोन लेने की सबसे बड़ी गलती?
जल्दबाज़ी।