EMI Trap
EMI Trap : जब कोई व्यक्ति लोन लेता है, तो बैंक सबसे पहले यही कहता है कि आपकी EMI इतनी बनेगी। रकम सुनकर लगता है कि सब मैनेज हो जाएगा। लेकिन सच्चाई यह है कि EMI पहले महीने से नहीं, धीरे-धीरे आपकी सैलरी पर असर डालती है। यह पोस्ट किसी किताब की परिभाषा नहीं है। यह वही अनुभव है, जो हर EMI भरने वाला इंसान महसूस करता है।
1. सबसे पहले समझिए – EMI होती क्या है?
EMI का मतलब है हर महीने बैंक को दिया जाने वाला तय पैसा।
इस रकम में दो चीज़ें शामिल होती हैं:
- लोन का एक हिस्सा
- उस पर लगने वाला ब्याज
EMI हर हालत में देनी होती है, चाहे आपकी आमदनी अच्छी हो या खराब। बैंक EMI आपकी परिस्थिति देखकर नहीं, तारीख देखकर काटता है।
2. EMI छोटी इसलिए लगती है क्योंकि पूरी ज़िंदगी सामने नहीं होती
जब बैंक EMI बताता है, तो वह सिर्फ लोन की बात करता है।
असल ज़िंदगी में साथ-साथ ये खर्च भी चलते हैं:
- घर का खर्च
- बच्चों की पढ़ाई
- राशन, बिजली, पानी
- दवा और पेट्रोल
- अचानक आने वाली ज़रूरतें
इसी वजह से शुरू में EMI आसान लगती है, लेकिन कुछ महीनों बाद वही EMI भारी महसूस होने लगती है।
3. EMI सैलरी को कैसे दबाती है – धीरे लेकिन लगातार
EMI एक झटके में परेशानी नहीं बनती। पहले महीने लगता है सब ठीक है। तीसरे-चौथे महीने बचत कम होने लगती है। छह महीने बाद पैसा रुकता नहीं दिखता। एक साल बाद लगता है कि सैलरी आते ही खत्म हो जाती है। EMI का असर तेज़ नहीं होता, लेकिन लगातार होता है।
4. एक से ज़्यादा EMI असली समस्या बन जाती है
अधिकतर लोग यहीं फँसते हैं। पहले एक लोन लिया जाता है। फिर दूसरा। फिर क्रेडिट कार्ड की EMI जुड़ जाती है। धीरे-धीरे सैलरी का बड़ा हिस्सा EMI में चला जाता है और तनाव बढ़ने लगता है। EMI तब खतरनाक बनती है,
जब वह आदत बन जाती है।
5. EMI आपकी ज़िंदगी के फैसलों को भी कंट्रोल करने लगती है
ज्यादा EMI होने पर व्यक्ति:
- नौकरी बदलने से डरता है
- नया काम शुरू नहीं कर पाता
- कोई जोखिम नहीं लेना चाहता
क्योंकि दिमाग में हर समय यही चलता रहता है कि EMI कैसे जाएगी।
6. EMI कितनी होनी चाहिए – सच्चाई
अक्सर कहा जाता है कि EMI सैलरी की 30–40 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होनी चाहिए।
लेकिन असल ज़िंदगी में EMI इतनी होनी चाहिए कि
- घर का खर्च आराम से चले
- इमरजेंसी में उधार न लेना पड़े
- मानसिक दबाव न बने
अगर EMI भरने के बाद हर महीने परेशानी रहती है, तो EMI ज़्यादा है।
7. EMI समय पर न जाए तो क्या होता है
अगर EMI लेट होती है तो:
- पेनल्टी लगती है
- क्रेडिट स्कोर गिरता है
अगर यह बार-बार हो, तो कॉल और नोटिस आने लगते हैं, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है। EMI सिर्फ पैसे नहीं काटती, यह आपकी साख भी खराब करती है।
8. शुरू के सालों में EMI ज़्यादा भारी क्यों लगती है
क्योंकि शुरुआती समय में EMI का बड़ा हिस्सा सिर्फ ब्याज में चला जाता है। इसीलिए कई लोगों को लगता है कि
इतने साल EMI देने के बाद भी लोन कम क्यों नहीं हुआ।
9. EMI को लेकर लोग सबसे बड़ी गलती कहाँ करते हैं
- सिर्फ EMI देखकर लोन लेना
- भविष्य की स्थिति के बारे में न सोचना
- यह मान लेना कि सब ठीक चलता रहेगा
ज़िंदगी हमेशा योजना के अनुसार नहीं चलती।
10. एक सीधी बात, जो कोई बैंक नहीं कहता
अगर आपकी EMI आपकी आज़ादी छीन रही है और हर महीने तनाव दे रही है, तो वह EMI सही नहीं है।
यह भी देखें: Secured vs Unsecured Loan : कौन राहत देता है और कौन फँसाता है? जाने
निष्कर्ष
EMI सिर्फ एक रकम नहीं, यह हर महीने निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है। लोन लेने से पहले EMI को कागज़ पर नहीं, अपनी ज़िंदगी में बैठाकर देखना चाहिए। अगर EMI ज़िंदगी के साथ चल पा रही है, तो लोन सही है। अगर वह ज़िंदगी पर भारी पड़ रही है, तो रुकना ही समझदारी है।
FAQs
1. EMI क्या होती है?
हर महीने बैंक को दिया जाने वाला तय भुगतान।
2. EMI कब परेशानी बनती है?
जब वह सैलरी का बड़ा हिस्सा लेने लगे।
3. एक से ज़्यादा EMI लेना सही है?
अगर इनकम स्थिर और पर्याप्त हो, तभी।
4. EMI लेट होने पर क्या होता है?
पेनल्टी लगती है और क्रेडिट स्कोर खराब होता है।
5. EMI कम कैसे की जा सकती है?
लोन अवधि बदलकर या लोन जल्दी चुकाकर।